Monday, 14 November 2016

कभी रंग....

कभी रंग...

कभी रंग-पैहरन,तो कभी आरजू है जिंदगी..
जिसे चाहा ,वो मिल जाए तो मंजिल है जिंदगी..
हजारों तकलीफें ,जाने किस-किसकी रुसवाईयां..
उसकी खुशी,मेरा ग़म..यही 'विकल्प' है जिंदगी...
                  😊अजय जैन 'विकल्प'

No comments:

Post a Comment