Sunday, 31 December 2017

पाप..

जाते-आते साल में पाप से बचिए...
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31 दिसम्बर को हर साल की अंतिम रात और नए वर्ष की शुरुआत माना जाता है, भले ही फिर यह अंग्रेजी कैलेण्डर से गलत हो या सही...नए साल का उत्सव लगभग 4000 साल से भी पहले बेबीलोन में 21 मार्च को मनाया जाता था,जो वसंत के आने की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव तभी मनाया जाता था। रोम के बादशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45 वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की,तब विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए साल का उत्सव मनाया गया। नया साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को होता है। इतिहास से मिली जानकारी के अनुसार 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 से हुई। इसके कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर है।
खैर,अलग-अलग संस्कृतियों के अपने कैलेंडर और अपने नव वर्ष होते हैं,इसलिए दुनिया के देश अलग-अलग समय पर नया साल मनाते हैं। भारत में हिंदू नव वर्ष चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा यानी गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है तो दीपावली के अगले दिन से जैन नववर्ष शुरू होता है। ऐसे ही पंजाब में नया साल वैशाखी पर्व के रूप में तथा पारसी धर्म का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में 19 अगस्त को मनाया जाता है।
लोग इस जाती रात और आते दिन की खुशी को मना रहे हैं और मनाते रहेंगे,समझाने से नए साल के जश्न में कितने प्रतिशत कमी आई है,ये अलग बात है,पर सभी को इस रात को किए जाने वाले कई पापों से बचना चाहिए। आप किसी भी जाति-समाज से हों,पहले भारतीय नागरिक हैं,इतना ही याद रखिए,इसलिए इस रात को कोई अच्छा कार्य नहीं कर सकें तो पाप के भागीदार भी मत बनिए। इस रात को आप शराब,शबाब और अन्य नशों से दूर रहिए। किसी की पसंद और उससे जुड़े रहने की खातिर कई लोग अपना ईमान बेच देते हैं,जिससे बाद में पछतावा होता है, इसलिए जमीर को कभी बेचिए मत। नए साल की खुशी मनाईए,पर होटल,पब और मदिरालय से दूर रहिए। जवानी के जोश में नशे के इन अड्डों पर जाकर अपने कीमती दिमाग और शरीर को शराबी, चरसी,गंजेड़ी मत बनाइए। शुरू में अच्छी लगने वाली इन चीज़ों के चूल्हे में बहूमूल्य युवावस्था को मत जलाइए। आते-जाते साल की खुशी में किशोरवय से लेकर धनाढय अधेड़ तक लड़कियों की ईज़्जत से खेलते हैं,जो शुध्द रुप से पतन ही है। परिजनों को चाहिए कि,खुलेआम की जाने वाली ऐसी बेशर्मी से युवा भविष्य को सचेत करते हुए बचाएं। क़रीबन सभी धर्मों ने ऐसी गतिविधियों को महापाप करार दिया है,तब भी अफ़सोसजनक है कि आज सभी वर्ग इस रात को मनाते हैं। बेहतर विकल्प तो यह है कि,इस रात या नए दिन को यह होना चाहिए कि बच्चों-बुजुर्गों की सेवा और मदद की जाए। उनके साथ रुककर खुशियाँ बांटी जाए,ताकि उनकी उम्मीदों को और धड़कनें मिल जाए। ऐसा नहीं कर पाएं तो पसंद का दूसरा काम कीजिए। यकीन कीजिए कि,आपका दिल इससे बहुत अच्छा अनुभव लेकर ही उठेगा।
एक साल के समय से अपने रिश्तों पर भी ध्यान दीजिए। हालांकि,ये बंधन साल के मोहताज नहीं होते हैं,पर इनका लेखा-जोखा भी समझना ही चाहिए। जिन्होंने आपकी सालभर चिंता की है,आप भी उनकी फिक्र किजिए। हम कहाँ सही हैं और कहाँ नहीं,इसका हिसाब ऊपरवाला अपने हिसाब से और नीचे वाले भी हिसाब अपने हिसाब से ही लगाते हैं और लगाते रहेंगे,भले ही फिर हमारे सही-गलत होने को मात्र परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा ही जानती है।
इस तरह हर साल का आख़िरी दिन जाकर हमारी जिंदगी का एक और साल जद्दोजहद में जुड़ जाता है। इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हम खोते हैं-पाते हैं, और इसका विश्लेषण भी करते ही हैं, मेरा समझना है कि,हमें उस वक्त की फिक्र करनी चाहिए,जो हमने अपनों को या क़रीबी रिश्तों को दिया। जीवन में तरक्की और विकास कीजिए,पर रिश्तों की जमा पूँजी को क़तई मत भूलिए। इनकी चिंता और देखभाल अपने को ही करनी होगी। जिन्दगी की तकलीफों में से कुछ पल इनके लिए भी निकालें,ताकि रिश्तों में नींबू जैसी खटास नहीं आए। पुराने अनुभव और पक्के रिश्तों को साथ लेकर नए साल में नई सकारात्मकता के साथ नए संकल्प पूरे कीजिए। धर्म और आध्यात्म की राह पर चलकर मानव कल्याण और राष्ट्रप्रेम की भावना को सबमें भी जागृत कीजिए,तभी सब प्रबल बनेंगे। जाति-धर्म के खांचों से बाहर आकर समाज-देश की उन्नति में
तन-मन-धन से समर्पण दीजिए,तभी वर्षों की सार्थकता सिद्ध होंगी,सभी मित्रों -आदरणीययों को शुभकामनाएं।
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आपका शुभेच्छु 🙏
#अजय जैन 'विकल्प'
ajayjainvikalp@gmail.com
9770067300

Tuesday, 26 December 2017

Saturday, 16 December 2017

राजनीति में ऐसी 'नीचता...'

शीर्षक -राजनीति में ऐसी 'नीचता...'
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सवाल यह नहीं है कि,देश के प्रधानमंत्री को कांग्रेसी चरित्र के मणिशंकर अय्यर ने `नीच` से अलंकृत किया या गुजरात का अपमान हो गया,प्रश्न इतना है कि, क्या राजनीति में किसी राज्य की सत्ता पाने के लिए आखिर इतनी नीचे तक जाना पड़ रहा है कि,
                                                     

वे देश के मुखिया के लिए मुख्य विपक्षी दल का नेता और केन्द्रीय मंत्री रहा  व्याक्ति ऐसे `अपशब्द` का इस्तेमाल करेl आज कांग्रेस ने भले ही इसके बाद श्री अय्यर को दल से निलम्बित कर दिया है,पर इस बात पर चिंतन किया जाना बेहद जरुरी है कि,आखिर ऐसे शब्दों से किसी भी नेता पर बयानी हमला किया ही क्यों जाएl क्या कांग्रेस के पास वाकई ऐसे विषय या मुद्दे नहीं बचे हैं जिससे वह गुजरात में अपनी बात करोड़ों मतदाताओं तक पहुंचा सकेl यदि ऐसा है तो कांग्रेस के लिए वाकई तरस की बात है और इसके शीर्ष नेतृत्व के लिए भीl एक बड़ी बात इस हमले से सामने यह भी है कि,जब श्री अय्यर को इस चुनाव में कांग्रेस संगठन ने कोई जिम्मेदारी दी ही नहीं थी तो आखिर ऐसी क्या वजह आई कि उन्होंने चुनाव के एन मुहाने पर आकर सीधे पीएम पर ऐसा हमला बोलाl भाजपा को इसे कितना लाभ मिलेगा तथा परिणाम से कौन खुश होगा,यह बात अलग है पर कांग्रेस को इस पर भविष्य के लिए और चिंतित होना पड़ेगाl इस राज्य में लम्बे समय से काबिज भाजपा को कांग्रेस संभवत पहली बार कड़ी टक्कर देती दिख रही थी,पर श्री अय्यर ने राहुल गांधी और बाकी जमीनी नेताओं की इस बयान से मिटटी पलीत कर दी हैl यकीनन इस दाग क़ो धोने में संगठन को बहुत समय लगेगा,हाँ हो सकता है कि इसके बाद भी कांग्रेस को इस राज्य की जनता सिर पर बिठाकर मतदान में समर्थन जता दे ,पर इसकी संभावना कम  है, क्योंकि यदि राज्य की सत्ता कांग्रेस को मिल गई तो कई मुद्दों पर केंद्र की भाजपा सरकार से बड़े स्तर पर लड़ना पड़ेगाl ऐसा कहने के बीच हम कपिल सिब्बल को कैसे भुला सकते हैं जिन्होंने अयोध्या विवाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड का प्रकरण लड़ते हुए बिना बात के ही एक बवंडर खड़ा कर दियाl यह मुद्दा यूँ तो उत्तरप्रदेश का है,पर भाजपा ने इसे भी आड़े हाथों भुना लिया और गुजरात तक ले गईl कपिल सिब्बल भी कांग्रेसी नेता हैं केन्द्र में मंत्री रहे हैं,तब भी उनके द्वारा कांग्रेस को अभी नुकसान ही किया गया हैl उनके द्वारा आगामी आम चुनाव के पहले इस मामले का निर्णय नहीं करने का अनुरोध अदालत ने ठुकरा दिया है,पर यह राजनीति का मुद्दा बन गया और वक्फ बोर्ड ने भी उक्त पूर्व मंत्री को इसके लिए कोसा कि,बिना किसी बात-सहमति के उन्होंने फैसला बाद में आने की बात अदालत में कैसे कहीl         
कांग्रेस के नवोदित मुखिया राहुल गांधी ने ट्वीट करके प्रधानमंत्री के खिलाफ श्री अय्यर द्वारा `नीच` शब्द के उपयोग पर उनकी निंदा करके दल से भी बाहर कर दिया है और सबको हिदायत दी है कि,ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जाएl इस बीच शायद कांग्रेस यह भूल गई कि,ऐसा हमला तो नरेंद्र मोदी  भी करते रहे हैं,बस शब्द थोड़े-से अच्छे थेl अभिनेता परेश रावल ने सोनिया गांधी को `बार डांसर` कहा था,तब श्री मोदी क्यों चुप थे,इसका जवाब कांग्रेस को देश के लिए भाजपा या मोदी से मांगना चाहिएl ऐसे ही यह भी पूछना चाहिए कि,जब डॉ.मनमोहनसिंह को श्री मोदी ने `देहाती रेनकोट` कहकर संबोधित किया था,तो क्या वह असभ्य शब्दों की सीमा नहीं थीl ऐसे ही जब संबित पात्रा ने चैनल पर अपनी बात रखते हुए डॉ.सिंह को `गूंगा` कहा था,उत्तर प्रदेशी नेता विनय कटियार ने प्रियंका गांधी के लिए अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने राहुल गांधी को `मंदबुद्धि` कहा,इसका भी भाजपा से कांग्रेस उत्तर मांग सकती हैl पता नहीं,कांग्रेस क्यों चुप है,पर जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गांधी को अक्सर भाजपाई और श्री मोदी भरी सभा में गाली देते हैं,तब के इनके संस्कार पर भी सवाल उठाना चाहिए,क्या वे प्रधानमंत्री नहीं थे,क्या उनका अपमान नहीं हुआ था? अभी तो चुनाव सामने देखकर संगठन ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर क़ो कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है ताकि,जनता और दल में गलत सन्देश नहीं जाए,पर सबको यह भी याद रखना चाहिए कि,इसके पहले भी श्री अय्यर कई बार अपशब्दों का सदाबहार प्रयोग कर चुके हैं।
इस चुनाव में राजनीतिक मूल्यों के पतन और गंभीरता पर विचार करें तो यह बात भी समझ में आती है कि,कहीं या सब नूरा-कुश्ती तो नहीं? ऐसा इसलिए कि,गुजरात चुनाव में पहले चरण मतदान से   से ठीक एक दिन पहले 8 दिसंबर को भाजपा ने अपना `संकल्प-पत्र` जारी किया है,जो काफी पहले आ जाना थाl दल के वरिष्ठ नेता और केन्द्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दल की तरफ से यह `संकल्प-पत्र`(विजन डाक्यूमेंट) जारी किया है,जिसमें कहा कि,पूरे देश में एक राज्य ऐसा है जिसका ग्रोथ रेट डबल डिजिट में थाl  गुजरात चुनाव में पहले चरण  के मतदान से पहले अपना `संकल्प-पत्र` जारी करने की भाजपा की यह रणनीति निश्चित ही मतदाताओं के मानस पर गहरा असर करेगीl श्री जेटली ने इसमें बताया कि,`संकल्प-पत्र` में गुजरात के विकास का एजेंडा है तो सवाल यह है कि ,इसे इतनी देरी से क्यों जारी किया गयाl सीधी सी बात है कि,कांग्रेस कहीं-न-कहीं  मिलीभगत कहें या नासमझी कि.इसे जनता के बीच मुद्दा बनाकर चर्चा में नहीं ला पाईl वहीं भाजपा ने कांग्रेस द्वारा गुजरात के सामाजिक तुष्टिकरण करने को बड़ा मुद्ददा बना दिया,और इसे गुजरात के लिए नुकसानदायक बतायाl कुल मिलाकर बात इतनी है कि,आए दिन चुनावों में मूल्यगत राजनीति का अवमूल्यन हो रहा है,जिसका नमूना ऐसे अपशब्दों का सतत उपयोग में आना हैl ऐसे में समाज और सभी दलों के मार्गदर्शकों को चाहिए कि,इस पर अवश्य ही विचार किया जाए,वरना भविष्य में राजनीति का स्तर और नीचे आ जाएगाl