Saturday, 4 February 2017

आम का पेड़...सुप्रभात..


सुप्रभात आदरणीय दोस्तों..🌸
रविवार की जय राम जी की..

आम का पेड़...
एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था..जब भी फुर्सत मिलती वो पेड़ के पास पहुँच जाता..पेड़ के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया में सो जाता.. बच्चे और पेड़ के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया..बच्चा जैसे-जैसे बड़ा  होता गया, वैसे-वैसे उसने पेड़ के पास आना कम कर दिया..कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया..पेड़  उस बालक को याद करके अकेला रोता..एक दिन अचानक पेड़ ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा, और पास आने पर कहा-'तू कहां चला गया था? मैं रोज़ तुम्हें याद किया करता था,चलो आज फिर से दोनों  खेलते हैं।'
बच्चे ने पेड़ से कहा-'अब मेरी खेलने की उम्र नहीं है,मुझे पढ़ना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नहीं है।'
पेड़ ने कहा-'तू मेरे आम लेकर बाजार में बेच दे,इससे जो पैसे मिलें, अपनी फीस भर देना।'
बच्चे ने पेड़ से सारे आम तोड़ लिए और उनको लेकर चला गया..उसके बाद फिर कभी दिखाई नहीं दिया..आम का पेड़ उसकी राह देखता रहता..एक दिन वो फिर आया और कहने लगा-'अब मुझे नौकरी मिल गई है,मेरी शादी हो चुकी है,मुझे मेरा अपना घर बनाना है इसके लिए मेरे पास अब पैसे नहीं हैं।'
आम के पेड़ ने कहा-'तू मेरी सभी डाली को काटकर ले जा, उससे घर बना ले।'
तब उस जवान ने पेड़ की सभी डाली काट ली और लेकर चला गया..पेड़ के पास अब कुछ नहीं था..वो बिल्कुल बंजर हो गया था..कोई उसे देखता भी नहीं था..पेड़ ने भी अब वो बालक / जवान उसके पास फिर आएगा,यह उम्मीद छोड़ दी थी..एक दिन अचानक वहाँ एक बूढ़ा आदमी आया..उसने आम के पेड़ से कहा-'
शायद आपने मुझे नहीं पहचाना! मैं
वही बालक हूं, जो बार-बार आपके पास आता था और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।'पेड ने दु:ख के साथ कहा-'पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नहीं है, जो मैं तुम्हें दे सकूं।'
वृद्ध ने आँखों में आंसू लिए कहा-'
आज मैं आपसे कुछ लेने नहीं आया हूं,बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,आपकी गोद में  सिर रखकर सो जाना है।'इतना कहकर वो आम के पेड़ से लिपट गया, तो पेड़ की सूखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी..
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सबक-आग्रह🙏इस कहानी में आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं..जब हम छोटे थे, उनके साथ खेलना अच्छा लगता था.जैसे-जैसे बड़े होते चले गए  उनसे दूर होते गए..पास भी तब आए, जब कोई जरूरत पड़ी,कोई समस्या खड़ी हुई..आज अनेक माँ-बाप उस बंजर पेड़ की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे हैं..यदि हम इनमें वो बच्चा हैं,तो जाकर उनसे लिपटें,उनके गले लग जाएँ,फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा..इन्हें पर्याप्त प्यार दें..सबसे यही विनय..इंसान कितना स्वार्थी है जो मदद करे उसी का सर्वनाश कर देता है,इस बात कॊ बदलने में मदद करें..(साभार ,धन्यवाद..)
🐚जीवन को 'चंदन' बनाइए..हमेशा खुश रहिए, ताकि दूसरे भी आपसे खुश हो जाएँ..    
🙏🏼निवेदन,कृपया अपने आसपास
 सफाई का ध्यान रखिए..
🌻🍃🍃🍃🌺🍃🌸💿♻
🍄🌾🌴🍀♦🌲✨🌸🌹
आपका शुभचिंतक
🔺अजय जैन 'विकल्प'
[ब्लॉगर, लेखक &चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर(म.प्र.)] ajayjainvikalp@gmail.com
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अनुरोध🙏अपनी व्यस्तता में से
ज़रा-सा वक्त बचाकर एक बार
www.matrubhashaa.com
ज़रूर देखिए..और कृपया रचना/
बहुमूल्य सुझाव भी दीजिए..साथ ही कृपया अपने किसी एक लेखक मित्र का नाम-सम्पर्क न.अवश्य दीजिए..
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