Wednesday, 22 June 2016

अहसास...

🌸🙏सुसंध्या  😊💐

✅अहसास से अपनापन...
*रामायण कथा का एक अंश*..

जिससे हमें  *सीख* मिलती है *"एहसास"* की..

*श्री राम, लक्ष्मण एवं  सीता मैया* चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे..
राह बहुत *पथरीली और कंटीली* थी !
कि  यकायक *श्री राम* के चरणों मे *कांटा* चुभ गया !

श्रीराम *रूष्ट या क्रोधित* नहीं हुए, बल्कि हाथ जोड़कर धरती माता से *अनुरोध* करने लगे !
बोले- "माँ, मेरी एक *विनम्र प्रार्थना* है आपसे, क्या आप *स्वीकार* करेंगी ?"

*धरती* बोली- "प्रभु प्रार्थना नहीं, आज्ञा दीजिए !"
प्रभु बोले, "माँ, मेरी बस यही विनती है कि जब भरत मेरी खोज में इस पथ से गुज़रे, तो आप *नरम* हो जाना !
कुछ पल के लिए अपने आँचल के ये पत्थर और कांटे छुपा लेना !
मुझे कांटा चुभा, सो चुभा, पर मेरे भरत के पाँव में *आघात* मत करना"

श्री राम को यूँ व्यग्र देखकर धरा दंग रह गई !
पूछा- "भगवन, धृष्टता क्षमा हो ! पर क्या भरत आपसे अधिक सुकुमार है ?
जब आप इतनी सहजता से सब सहन कर गए, तो क्या कुमार भरत सहन नहीं  कर पाएँगें ?
फिर उनको लेकर आपके चित में ऐसी *व्याकुलता* क्यों ?"

*श्री राम* बोले- "नहीं ...नहीं माते, आप मेरे कहने का अभिप्राय नहीं  समझीं ! भरत को यदि कांटा चुभा, तो वह उसके पाँव को नहीं, उसके *हृदय* को विदीर्ण कर देगा !"
*"हृदय विदीर्ण* !! ऐसा क्यों प्रभु ?",
*धरती माँ* जिज्ञासा भरे स्वर में बोलीं !

"अपनी पीड़ा से नहीं  माँ, बल्कि यह सोचकर कि...इसी *कंटीली राह* से मेरे भैया राम गुज़रे होंगे और ये *शूल* उनके पगों में भी चुभे होंगे !
मैया, मेरा भरत कल्पना में भी मेरी *पीड़ा* सहन नहीं कर सकता, इसलिए उसकी उपस्थिति में आप *कमल पंखुड़ियों-सी कोमल* बन जाना..!!"
अर्थात...
*रिश्ते* अंदरूनी एहसास, आत्मीय अनुभूति के दम पर ही टिकते हैं ।
जहाँ *गहरी आत्मीयता* नहीं ,
वो रिश्ता शायद नहीं , परंतु *दिखावा* हो सकता है..
इसीलिए कहा गया है कि...
*रिश्ते*खून से नहीं, *परिवार* से नहीं ,
*मित्रता* से नहीं , *व्यवहार* से नहीं ,
बल्कि...
सिर्फ और सिर्फ *आत्मीय "एहसास"* से ही बनते और *निर्वहन* किए जाते हैं।
जहाँ *एहसास* ही नहीं,
*आत्मीयता* ही नहीं ..तो
वहाँ *अपनापन* कहाँ से आएगा..
इसलिए अहसास से आत्मीयता रखिए और रिश्तों में अपनापन भी..  
*हम सबके लिए प्रेरणास्पद लघुकथा*
🍀🍀🍀🌷🍀🍀🍀
😃मुस्कुराते 😀रहिए 😀
आपका हर दिन मंगलमय हो..🙏🌸🍂
आपका शुभेच्छु 🙏🏻🌹
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ]
 ajayjainvikalp@gmail.com
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9770067300🌹🌺🙏🍀🙏
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