Sunday, 5 June 2016

सुसंध्या

सुसंध्या  🙏🍀
नमक जैसी मौजूदगी बनिए ,पर खट्टा नहीं..🍀
जीवन है तो रिश्ते होंगे ही और तकलीफ भी..ऐसे में आपको अपनी मौजूदगी को नमक जैसा बनाना ही सबसे बेहतर है..
चौंकिए मत , सामने होकर भी नहीं दिखना ही  नमक से सीखना है..
उसका खट्टापन -तीखापन नहीं..
आपने अक्सर देखा होगा कि ,यह
 भोजन में रहता है
 मगर  दिखाई  नहीं  देता..
और महत्व (गुण )देखिए कि
अगर न हो तो  कमी ज़रूर महसूस होती है..💐
हमें भी खुद की उपस्थिति को विकल्प के रूप में  कामयानि महत्व का बनाने में भिड़ना चाहिए..💐
मतलब आप न दिखाई दें तो हर कोई पूछे..
तो ही तो आप गुणी हुए न..
जैसे कि  भोजन में कई  व्यंजन होने पर भी नमक तो याद आता ही है और चाहिए भी..
🍀🍀🍀🌷🍀🍀🍀
😃मुस्कुराते 😀रहिए 😀
आपका दिन मंगलमय हो..🙏🌸🍂🌻
आपका शुभेच्छु 🙏🏻🌹
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ] ajayjainvikalp@gmail.com
indoreswadesh@gmail.com
9770067300🌹🌺🙏🍀🙏
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