Tuesday, 17 January 2017

मन का कचरा..सुप्रभात..

सुप्रभात माननीय मित्रों  🙏🌻🍀
((((मन का कचरा ))))
एक बार एक स्वामी जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगाई- भिक्षा दे दे माते !!
घर से महिला बाहर आई,उसने उनकी झोली मे भिक्षा डाली और कहा, -
“महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए!”
स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।” दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – भिक्षा दे दे माते!!
 घर की स्त्री ने उस दिन खीर बनाई थी,जिसमें बादाम-पिस्ते भी डाले थे..
वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आई तो स्वामी जी ने कमंडल आगे कर दिया.. स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ा है..उसके हाथ ठिठक गए.. बोली-“महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है।”
स्वामीजी बोले-“हाँ, गन्दा तो है,किन्तु खीर इसमें डाल दो।”
स्त्री बोली-“नहीं महाराज, तब तो खीर ख़राब हो जाएगी.. दीजिए,यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ।”
स्वामीजी बोले-मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जाएगा, तभी खीर डालोगी न ?”
स्त्री ने कहा- “जी महाराज !”
स्वामीजी बोले- “मेरा भी यही उपदेश है..मन में जब तक चिन्ताओं का कूड़ा-कचरा और बुरे संस्कारों का गोबर भरा है, तब तक उपदेशामृत का कोई लाभ न होगा..यदि उपदेशामृत पान करना है, तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए,कुसंस्कारों  का त्याग करना चाहिए, तभी सच्चे सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी..
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 🙏😊🍀🍃🍁💐🌸
🐚 हमेशा खुश रहिए, ताकि दूसरे भी आपसे खुश हो जाएँ..निवेदन🙏कृपया अपने आसपास सफाई का ध्यान रखिए..
🌻🍃🍃🍃🌺🍃🌸💿♻
😊जीवन को 'चंदन' बनाइए..
आपका हर दिन अच्छा ही बीतेगा..
🍄🌾🌴🍀♦🌲✨🌸🌹
आपका शुभचिंतक
अजय जैन 'विकल्प'
[ब्लॉगर, लेखक &चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर(म.प्र.)] ajayjainvikalp@gmail.com
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अनुरोध🙏अपनी व्यस्तता में से
ज़रा-सा वक्त बचाकर एक बार
www.matrubhashaa.com
ज़रूर देखिए..और कृपया रचना/
बहुमूल्य सुझाव भी दीजिए..साथ ही कृपया अपने किसी एक लेखक मित्र का नाम-सम्पर्क न.अवश्य दीजिए..
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