शायद पार्टी ही कन्फ्यूज हैराहुल के भविष्य पर
अजय जैन ' विकल्प '
जिसने कभी खुद मंडी में जाकर या ठेले वाले भय्या से आलू नहीं खरीदाहो ,वो भला कैसे समझेगा कि आलू की फैक्टरी नहीं होती है।अरे अभीतक जो अपने संगठन कॊ जी ही नही पाया ,वो भला मानुष तो 'सर्जिकलस्ट्राइक' कॊ भी आलू ही मानेगा न।इसके लिए इनकी कांग्रेस पार्टी सहितकॊई भी नेता अगर इनको जिम्मेदार मानता है तो गलती उस संगठन कीहै,जिसने इनको 'खून की दलाली' कहने के लिए देश में नेता के भेष मेंअकेले छोड़ दिया है।बस जनपथ से ही चल रही पार्टी की मुखिया कॊअब तो समझना-स्वीकारना चाहिए कि ,गाँधी का मतलब ही स्वीकार्यसत्ता,लोकप्रिय छवि और जनप्रतिनिधि नहीं होता है।ऎसा बनने के लिएजीवन तक त्यागना पड़ता है।सेना की 'सर्जिकल स्ट्राइक 'पर भाजपा केश्रेय कॊ लेकर राहुल ने क्या कहा,सवाल अब यह नही है।वरन ये है किराहुल गांधी आखिर बात-हालात की गहराई कॊ नापना कब समझेंगे-सीखेंगे।इनके अब तक के राजनीतिक सफर में इतने उतार-चढ़ाव आनेपर भी इन्होंने कोई सबक सीखा हो,इस पर विश्वास करना अभी भी ज़रामुश्किल है।वास्तव में बात भाजपा, सपा या कांग्रेस की नहीं है,उस हरयुवराज की है जिसे संगठन-सत्ता विरासत में मिली है।राहुल गाँधी कॊइनकी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता अक्सर 'राहुल बाबा' (प्रिय बच्चा याअनुभवी वरिष्ठ )के तौर पर बुलाते हैं,जिसकी पहचान तब होती है जब येबेहद महत्वपूर्ण मामले में भी देशव्यापी विवाद खड़ा कर देते हैं।यानिइतने अनुभव और बड़ी सोच से दूर स्थानीय नेता जैसे बोलते हैं। कभी -कभी इनकी बुद्धि पर बड़ा तरस यूँ भी आता है कि,जिस मसले परसोनिया गांधी ने विपक्षी होकर भी सरकार कॊ नही कोसा और हर छोटे-बड़े नेता ने पाकिस्तान के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक ' कॊ भारतीय सेनाका अच्छा जवाब बताया,उस पर 'बाबा' ने अनुभव से बड़े बनकर जरा भीनही सोचा। बस मौका मिला तो 'खून की दलाली...' बोल पड़े। पहले यूपीमें प्रभार लेकर पराजय का 'हार' ले चुके राहुल ने वहाँ तो मोदी सरकारकॊ नही कोसा,लेकिन दिल्ली आते ही पता लग गया कि इनके वफादारभी कैसे हैं।ये फ़िर साबित हो गया है कि राहुल गाँधी नाम होने औरविदेश में महँगी पढ़ाई का मतलब ही समझदारी नही होता है,वो तो दूरका भविष्य देखने और चीजों कॊ प्रैक्टिकली लेने से आती है।पहले भीकांग्रेस उपाध्यक्ष रहते हुए ही राहुल ने कहा था - यूपी के लोग भिखारीहोते हैं।इनके इस बयान पर बखेड़ा होकर शांत हुआ तो भी इन्होंनेबोलना नही सीखा।भूली-बिसरी यादों में जाईए तो याद आएगा कि इनमहाराज ने ही कहा था-पंजाब के 70 प्रतिशत लोग नशेड़ी होते हैं।ये तबभी जिम्मेदारी के पद (उपाध्यक्ष) पर ही थे।सबसे पुराने दल और सबसेअधिक समय तक सत्ता में रही कांग्रेस के युवराज कॊ अभी कितना औरक्या सीखना है ,ये संगठन का आंतरिक विषय हो सकता है लेकिन जबपद बड़ा हो,और तब भी राष्ट्रीय नेतृत्व में समझने-बोलने की जिम्मेदारी हीनही हो तो आलू की फैक्टरी ही डालना अधिक बेहतर हो सकता है।फिलहाल तो इन्हें (दिमाग से ही)बड़े होने की सख्त आवश्यकता है,वरनाकिसी दिन कांग्रेस कॊ इनके बयानों पर पूरे देशवासियों से ही माफीमांगनी पड़ सकती है।यकीनन पार्टी के पास परिवार में नेता रूप में दूसराविकल्प नहीं है किन्तु राहुल बोलें और खराब बोलें-विवादित बोलें,इससेतो अच्छा है कि,चुप ही रहें।इनके बोलने से मिलते फायदे की आस में चुपरहने से हो रहा नुकसान पार्टी के लिए बेहतर है। इस मामले की गम्भीरतादेखी जानी कहीं अधिक ज़रूरी है कि नुकसान कितना और किस तरहका होगा।क्या पार्टी और आप भूल गए ,जब बाबा बोले थे -गरीबी सिर्फदिमाग का वहम है..और यह भी कि - इस देश को हिन्दुओ से ज्यादाखतरा है। इस बयानवीर के पुराने कई भाषण देखिए,तरस और हंसीआती है। इनके बेकार के बयानों और विवाद से अब तो यह लगता है किपार्टी ही नही चाहती है कि,ये लोकप्रिय नेता बनें।इसलिए सही की बजाएउल्टी राय देती है जिससे इनको लम्बा राजनीतिक घाटा हो।लम्बेअज्ञातवास पर जाने और नई ऊर्जा से भरकर आने पर भी इनके ताजाबयान से बच्चा बुद्धि ही झलकती है।कांग्रेसी करुणा निधि,रेणुकाचौधरी,हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता धरमवीर गोयल हों या श्रीप्रकाशजैसवाल(पूर्व कोयला मंत्री) और सलमान खुर्शीद ,इन्होंने भी कई गम्भीरमुद्दों पर ऊलजलूल बयान दिए थे।शायद राहुल भी उसी राह पर चलनिकले हैं,जिसका परिणाम बहुत खराब यानि संगठन -सत्ता से दूर होजाना है।राहुल के इतने अधिक शिक्षित होकर भी बुद्धि पर तरस इसलिएआता है कि,पाकिस्तान ने 'सर्जिकल स्ट्राइक' का बदला लेने के लिएएनजीटी की वेबसाइट हैक कर ली,तो भी बाबा कॊ ये सैनिकों के खून कीदलाली ही लगी,जबकि नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की वेबसाइट हैक करकेहैकर्स ने होम पेज पर गालियां लिखी और पीओके में भारतीय सेना कीकार्रवाई को लेकर निशाना साधा।इस समय विद्वान केजरीवाल भी सो रहेथे।ऐसा मानना-कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस संगठन इनकेकन्फ्यूजन कॊ दूर नहीं कर सका है या वास्तव में ऐसा प्रायोजित रूप सेआला नेता ही करा रहे हैं।अरे पहली बार नेता और मुख्यमंत्री बनेकेजरीवाल की मति पर पड़े भाटे तो समझ में आते हैं किन्तु राजीव गांधीजैसे दूरदर्शी के पुत्र होकर भी ऐसी बचकानी बातें करना अनेक बातों कीतरफ़ स्पष्ट इशारा है।पार्टी में पहली पंक्ति के जिम्मेदारों कॊ इस गम्भीर्यकॊ समझने की नितांत आवश्यकता है कि क्या वाकई राहुल में अब भीअच्छे संगठक के गुण हैं..। कहने में कोई गुरेज नही कि नसीब और कर्मसे इन्हें भविष्य में जो भी मिले,पर पार्टी कॊ अभी तो नुकसान सामने हीहै..
वाकई ,सल्लू तुम देश के नहीं
इस बयानबाजी के दौर में लगी आग से फिल्म अभिनेता भी बच नहीसके। जब ओमपुरी ने बयान दिया तो इसे सैनिकों के संगठन ने ही शहीदोंका अपमान बता दिया और सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई।नतीजा किदेहरादून और ऋषिकेश में भारतीय सेना और शहीदों को लेकरआपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पूर्व नौसैनिक संगठन और पूर्वसैनिक संगठन की शिकायत पर अभिनेता ओमपुरी के खिलाफ मुकदमादर्ज हो गया।तो क्या राहुल बाबा कॊ यह बात भी समझ नही पड़ी।इससेपहले सल्लू उर्फ सलमान खान की देश भक्ति देखिए कि,पाक कलाकारोंके मामले में बोल पड़े..पर राहुल यहाँ भी चुप रहे।इनका तो ठीक,परसलमान खान का मुँह उस समय नहीं खुला था,जब अनुपम खेर कोवीजा नहीं मिला था या फ़िर पाक में भारतीय फिल्मों पर बैन लगता है।पाकिस्तानी होकर अब भारतीय बन चुके गायक अदनान सामी नेभारतीय सेना की प्रशंसा की तो भी पाक का पेट दुःख गया, पर राष्ट्रीयपद पर आसीन राहुल बाबू कॊ तब भी समझ नहीं पड़ी कि ये खून कीदलाली नहीं है। संगठन कॊ इनके राजनीतिक विकल्प तलाशने चाहिए ।राहुल की समझ थोड़ी और देखिए कि, उरी हमले के बाद से ही भारतऔर पाकिस्तान के संबंधों में तनाव है ,तब भी यह पाक के विरोध में कुछखास नही बोले।हमारी सेना पर हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारवापस चले गए,जिस पर भारत में कई नेताओं और अभिनेताओं नेविवादित बयान भी दिए तो पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम ने भीविवादित बयान(भारत काफिरों का देश ) देकर माहौल को और ख़राबकिया..पर कांग्रेस के युवराज चुप रहे।भारत से जंग करने की हिम्मत मेंही परास्त पाकिस्तान ने भारत के लिए अपने सभी एयरस्पेस से विदेशीकमर्शियल एयरलाइंसों को कम ऊंचाई पर उड़ान भरने से रोक लगादी,तब भी राहुल गांधी और स्वयंभू विद्वान अरविन्द केजरीवाल कीआवाज़ नही निकली, जबकि इस रोक का सीधा मतलब था कि लाहौर केऊपर से 29,000 फीट से कम ऊंचाई पर कोई भी विमान उड़ान नहीं भरपाएगा और भारतीय विशेषज्ञ पाक के इस कदम को भारत केकूटनीतिक दबाव और 'सर्जिकल स्ट्राइक' का असर बता चुके थे।वो तोभला हो सेना के लिए सदैव अच्छा सोचने-करने वाले नाना पाटेकर का,जो उन्होंने सेना के पक्ष में फालतू के बयानों पर 'प्रहार ' किया तोइधर 'सर्जिकल स्ट्राइक' पर सबूत मांगने वालों को अभिनेता अक्षयकुमार ने सैनिक-सा मुंहतोड़ जवाब दिया। फेसबुक पर वीडियो डालकरउन्होंने पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेनाके लक्षित हमलों पर उठाये जा रहे सवालों की न बस आलोचना की,बल्कि कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने वालों(केजरीवाल) कोशर्म करना चाहिए। राहुल बाबा ने शायद इनको देखा-सुना नही,सम्भव थाकि खून की दलाली और आलू की फैक्टरी जैसी बात नही करते।अक्षयकुमार ने यह भी कहा कि,आपस में झगड़ने वाले शहादत का सम्मानकरें, सेना पर सवाल उठाना ठीक नहीं। सेना पर सवाल न उठाएं, सेना हैतो हम हैं,सेना नहीं तो हिंदुस्तान नहीं। अक्षय कुमार ने कहा कि वह इसबात से हैरान हैं कि कुछ लोग ऐसे समय में पाकिस्तानी कलाकारों परपाबंदी पर बहस कर रहे हैं जबकि सीमा पर आतंकी हमले में हमारेजवान शहीद हुए हैं। पाक कलाकारों के समर्थकों (सलमान ) को शर्मकरना चाहिए।सलमान ने तो यह साबित कर ही दिया कि वो भारत मेंहोकर भी देशभक्त नहीं हैं,पर बाबा तो इसे भी नहीं समझे।बेहतर हो किराहुल बाबा चुप रहकर बोलना सीखें।
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ]
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