Thursday, 21 July 2016

सुसंध्या

सुसंध्या 🌸माननीय 🙏🏻
आज का भी 'आनंद' लीजिए..
एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूर्ण मेहनत तथा ईमानदारी से करती थी..
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम करके भी खूब खुश थी क्योंकि उसके मालिक .....
जंगल के राजा शेर ने उसे 10 बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था..
गिलहरी काम करते-करते थक जाती थी तो सोचती थी कि थोड़ा आराम कर लूँ ....
वैसे ही उसे याद आता था - कि शेर उसे अखरोट देगा तो  गिलहरी फिर काम पर लग जाती..
गिलहरी जब दूसरी गिलहरीयों को खेलते - कूदते देखती तो उसकी भी इच्छा होती थी कि मैं भी enjoy करूँ !
तब उसे अखरोट याद आ जाता था,
और वो फिर काम पर लग जाती..
शेर कभी - कभी उसे दूसरे शेर के पास भी काम करने के लिए भेज देता था..
ऐसा नहीं कि ,शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था , शेर बहुत ईमानदार था..
ऐसे ही 🕰 बीतता रहा....
एक दिन ऐसा भी आया ,जब जंगल के
राजा शेर ने गिलहरी को 10 बोरी अखरोट देकर आजाद कर दिया..
गिलहरी अखरोट के पास बैठकर सोचने लगी कि-
अब अखरोट हमारे किस काम के ?
पूरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गए , इसे खाऊँगी कैसे..?
दरअसल ,
यही कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है...इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है, और पूरी जिन्दगी नौकरी में बिता देता है..जब वो रिटायर होता है तो उसे उसका फन्ड मिलता है..तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है, परिवार को चलाने वाला मुखिया बदल जाता है..
क्या नए मुखिया को इस बात का अन्दाजा लग पाएगा कि इस फन्ड के लिए -
कितनी इच्छाएं मरी होंगी ?
कितनी तकलीफें मिली होंगी ?
कितने सपने रहे होंगे ?
 क्या फायदा ऐसे फन्ड का, जिसे
पाने के लिए  पूरी जिन्दगी लगाई जाए   और उसका इस्तेमाल खुद न कर सकें..भविष्य और पैसे की भी चिंता कीजिए ,पर आज की खुशी को भगाकर नहीं..याद रखिए कि ,
'इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी
तक पैदा नहीं हुआ ,जो बीते हुए समय
को खरीद सके'..😊
*TIME IS मनी*
*Enjoy ..TODAY*
🍁🌴🍄🌾🌴🍀♦
😃कभी-कभी बस मुस्कुराईए  😀
आपका आज और कल भी मंगलमय हो..
आपका शुभेच्छु 🙏🏻🌹
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ] ajayjainvikalp@gmail.com
indoreswadesh@gmail.com
9770067300🌹🌺🙏🍀🙏
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