🌸😊आदरणीय सुसंध्या ...🍁
किसी नदी भांति ही जिंदगी का प्रवाह भी अपनी गति से चलता रहता है..कभी हर्ष- कभी विषाद..यह सब जीवन में लगे रहते हैं.. हर किसी का जीवन जीने का और जिंदगी के प्रति अपना नजरिया होता है.. महत्व यह नहीं कि आपने जीवन कितना लम्बा जिया,बल्कि सोचा यह जाता है कि कितना सार्थक जीया..जीवन के इस सफर में न जाने कितने पड़ाव आए हैं , और आएँगे भी..जीवन का कारवां यूँ ही बढ़ता जाएगा..जीवन के हर मोड़ पर जो चीज महत्वपूर्ण लगती है,वही अगले क्षण गौण हो जाती है..पल-प्रतिपल हमारी प्राथमिकताएं बदलती जाती हैं..पर सीखने का क्रम इसी के साथ अनवरत चलता रहता है..मुझे लगता है कि व्यक्ति को रूटीनी जीवन जीने की बजाय नित नए या कहें कि रचनात्मक ढंग से सोचना चाहिए.. जैसे हर सुबह सूरज की किरणें नई होती हैं..हर पुष्प गुच्छ नई खुशबू से महकता है.. प्रकृति की अदा में नयापन होता है.. वैसे ही हर सुबह मानव जीवन को तरोताजा होकर अपने ध्येय की तरफ अग्रसर हो जाएं..मत सोचिए सफलता-असफलता को..यह तो जीवन में सिक्के के दो पहलुओं की भांति हैं..कभी मंजिल मिली तो कभी पराजय से फ़िर कुछ सीखने का विकल्प भी..इन्हें आत्मसात कर आगे बढ़ने में ही जीवन प्रवाह का राज छुपा हुआ है..तो चलिए ,क़दम आगे बढ़ाइए..ईश्वर आपके साथ है..
*TIME IS मनी*
*Enjoy ..TODAY*
🍁🌴🍄🌾🌴🍀♦
😃 बस यूँ ही मुस्कुराईए 😀
आपका आज और कल भी मंगलमय हो..
🌴🍄🌾🌴🍀♦🌲🍃🌺
आपका शुभेच्छु 🙏🏻🌹
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ] ajayjainvikalp@gmail.com
indoreswadesh@gmail.com
9770067300
(🙏🏻फेसबुक ,ब्लॉग ,पेज और शेयर चेट पर भी उपलब्ध..हर संदेश पर आपकी प्रतिक्रिया के इंतजार में )
🌾🍂🍃🌹🍂🌹🍂🌹🍁
किसी नदी भांति ही जिंदगी का प्रवाह भी अपनी गति से चलता रहता है..कभी हर्ष- कभी विषाद..यह सब जीवन में लगे रहते हैं.. हर किसी का जीवन जीने का और जिंदगी के प्रति अपना नजरिया होता है.. महत्व यह नहीं कि आपने जीवन कितना लम्बा जिया,बल्कि सोचा यह जाता है कि कितना सार्थक जीया..जीवन के इस सफर में न जाने कितने पड़ाव आए हैं , और आएँगे भी..जीवन का कारवां यूँ ही बढ़ता जाएगा..जीवन के हर मोड़ पर जो चीज महत्वपूर्ण लगती है,वही अगले क्षण गौण हो जाती है..पल-प्रतिपल हमारी प्राथमिकताएं बदलती जाती हैं..पर सीखने का क्रम इसी के साथ अनवरत चलता रहता है..मुझे लगता है कि व्यक्ति को रूटीनी जीवन जीने की बजाय नित नए या कहें कि रचनात्मक ढंग से सोचना चाहिए.. जैसे हर सुबह सूरज की किरणें नई होती हैं..हर पुष्प गुच्छ नई खुशबू से महकता है.. प्रकृति की अदा में नयापन होता है.. वैसे ही हर सुबह मानव जीवन को तरोताजा होकर अपने ध्येय की तरफ अग्रसर हो जाएं..मत सोचिए सफलता-असफलता को..यह तो जीवन में सिक्के के दो पहलुओं की भांति हैं..कभी मंजिल मिली तो कभी पराजय से फ़िर कुछ सीखने का विकल्प भी..इन्हें आत्मसात कर आगे बढ़ने में ही जीवन प्रवाह का राज छुपा हुआ है..तो चलिए ,क़दम आगे बढ़ाइए..ईश्वर आपके साथ है..
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