Thursday, 18 August 2016

पदक...

🚺 सुप्रभात मित्रों ...🌸😊
पदक से पहले..
हमें तो पदक से पहले साक्षी मलिक के केवल ओलम्पिक में पहुंच जाने पर ही खुश होकर नाचना चाहिए..इसलिए कि वो उस हरियाणा में पैदा हुई ,जहाँ अभी भी लड़कियाँ दोयम दर्जे पर हैं..जहाँ सम्मान /मान/बेटे को ही सब माना जाता है..जहाँ हर 1000 के पीछे 130 लड़कियों को मार दिया जाता हो,उस सूबे से साक्षी का रिओ में चले जाना ही क्या आश्चर्यजनक नहीं लगता हमें..काबिले गौर बात यह भी है कि इसी राज्य में लैंगिक अनुपात देश में सबसे अधिक  ख़राब है..शायद दुनिया भर में भी सबसे ख़राब..यानि यह लड़कियों के लिए नर्क/सबसे ख़तरनाक जगह है..इसलिए विपरीत हालातों वाले ऐसे राज्य की  साक्षी का यह काँस्य पदक भारत के लिए गोल्ड मैडल से भी बढ़कर है..हर भारतीय को इस पदक के लिए साक्षी के साथ उनके पालकों का भी भी आभारी होना चाहिए कि उन्होंने इसे दुनिया देखने के लिए जीने का विकल्प दिया..और पाल-पोसकर ओलम्पिक ( रिओ )तक जीत का यकीन भी पाला..बधाई..सिंधु और दीपा करमाकर को भी..यह बेटियाँ हैं भारत की जीत की साक्षी..
😃 बस यूँ ही मुस्कुराईए  😀
आपका हर दिन मंगलमय हो..
🌴🍄🌾🌴🍀♦🌲🍃🌺
आपका शुभेच्छु 🙏🌹
अजय जैन ' विकल्प '
[चीफ रिपोर्टर -स्वदेश समाचार पत्र, इंदौर ] ajayjainvikalp@gmail.com
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